मन क्या है और एकाग्रता क्या है?
प्रश्न : मन बड़ा विचित्र है, पटरी पर लेकर आता हूं फिर उतर जाता है। क्या करे? उत्तर : मन कोई रेलगाड़ी नहीं है जिसे पटरी पर लाया जाए। मन आप के एहसास और भावनाओं का केंद्र है जो नित्य परिवर्तनशील है, सुबह जो भावनाएं आप के अंदर उठी है दुपहर को वह नहीं होगी। आप मन को एकाग्र करने की जब कोशिश करते है तो ही वह भटकता है। आप समझे कि मन कब लगेगा, तो उसके ३ मार्ग है। (१) जो भी कार्य आप कर रहे है वह मस्ती,शांति,और सुकून देता है तो मन वहां खुद लगेगा। (२)प्रकृति के स्वाभाविक आवेग जैसे निद्रा, भूख,प्यास, भय,पीड़ा ,सेक्स और सुरक्षा में मन खुद ही लगेगा। (३) जब मन प्रेम,सुंदरता ,उत्साह,संगीत और उत्तेजना के विषयों में जुड़ेगा तो वह खुद एकाग्र होगा। वह विषय आपको स्वाभाविक रस देगा। अब इन तीनों के अलावा आप किसी भी कार्य में मन लगाओगे आप को प्रयत्न करना पड़ेगा। अब विद्यार्थी का ही उदाहरण ले, जिस भी विषय से उसे खुशी मिलती है और प्रेम होता है उस विषय को वह लंबी उम्र तक याद रख पाता है। वह उसके रक्त में बस जाता है क्योंकि उसका मन उस विषय में सहज एकाग्र हो जाता है और जहाँ मन एकाग्र होता है उस विषय क...