जीवन को देखने की तीन दृष्टि।
जीवन को देखने की तीन दृष्टि। ------------------------- (१) *मनुष्य सामाजिक है।* : यह दृष्टि मनुष्य को समाज की शिक्षा, धर्म, ज्ञाती,उच्च - निच,परंपरा, रूढ़ि वाद, अच्छा बुरा, लोभ, प्रभाव ,अधिकार से जोड़ती है। यह दृष्टि के अनुसार समाज में प्रभाव, धन या आप की प्रतिष्ठा आप की सफलता का मापदंड है, और इसी माप दंड के आधार पर दुनिया आप का मूल्यांकन करती है। और इसी से आप की पहचान बनती है। (२) *मनुष्य आयुष्य का एक निश्चित समय* है। - यह दृष्टि सामाजिक दृष्टिकोण से व्यापक है। जन्म और मृत्यु के बीच का समय ही जीवन है , तो मनुष्य एक आयुष्य की संभावना है, वह उसकी जाति, धर्म, शिक्षा और अधिकार से बहुत ऊपर है, और इस दृष्टि के आधार पर उसका मूल्यांकन उसके आयुष्य से प्राप्त समय का उसने किस तरीके से प्रयोग किया है उस पर है, उसका समय कैसे व्यतीत होता है इस पर उसके जीवन की गुणवत्ता है। वह चाहे तो किसी भी परिस्थिति में प्रसन्न रह सकता है। जितना प्रसन्न रहेगा, उसका समय उतना ही गुणवत्ता युक्त रहेगा। (३) *मनुष्य जीवसृष्टि की असीम संभावनाओं में से एक संभावना है।* - यह एक बहुत व्यापक दृष्टि है, इस ब्रह्मांड ...