_जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है?_
_जप मंत्र का वास्तविक अर्थ क्या है?_ उत्तर : श्रीकृष्ण गीता में यह कहते है कि मंत्रों में जप मंत्र मेरा ही स्वरूप है। जप का अर्थ है नित्य अपने अंतर में किसी एक विशेष संकल्प को दोहराना की जब तक वह संकल्प पूर्ण न हो जाय। और मंत्र यानी क्या? मंत्र यानी उस जप पर अपने मन को एकाग्र करना। जो भी शब्द,भाव,संकल्प,क्रिया आप के मन को एकाग्र करे और आप के संकल्प का भाव दृढ़ करे वह मंत्र है। चाणक्यने अखण्ड भारत का संकल्प लिया था, तो उन्होंने अपने पूरे अस्तित्व से इस संकल्प को पूरा करने में प्राण अर्पण किये इसी लिए उन्होंने अपने इच्छित लक्ष्य को प्राप्त किया। मीरा का कृष्ण के प्रति पति जैसा संकल्प था और वह जप मंत्र उसके अंतर में एकाग्र हो कर उसके अस्तित्व का अंग बन गया। फिर एक से एक पद,भजन और सांखी का निर्माण हुआ। _" *लोग अक्सर पूछते है कि जप करते वक्त ध्यान बहुत भटकता है, इसका उपाय क्या है?"_ * तो उसका जवाब यह है कि कोई भी संकल्प या भाव यदि आप के जीवन में सब से महत्वपूर...