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ભગવદગીતા અધ્યાય ૬ શ્લોક ૯.

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 ભગવદગીતા અધ્યાય ૬ શ્લોક ૯. ------------------------------ (૧) પ્રેમી  - હૃદય થી પ્રેમ કરનાર (રાધા/ માતા પિતા પત્નીઓ) - પ્રેમ,પોષણ પ્રસન્નતા (૨) મિત્ર -  સુખ દુઃખ માં સાથે રહેનાર (ઉદ્ધવ,સાત્યકિ) -  પ્રેમ, પોષણ, પ્રસન્નતા (૩) શત્રુ - અહિત કરનાર (જરાસંઘ) - ચુનૌતી (૪) અજાણ્યો - (પુણ્યજન રાક્ષસ) - જે આપણ ને બિલકુલ જાણતો નથી તે. - સ્વીકાર અને મર્યાદા (૫) તટસ્થ -(પરશુરામ) - જે  બાકી ના આઠ માંથી  કોઈ નથી તે. - સ્વીકાર (૬) તિરસ્કાર કરનાર (દ્વેષી) (શિશુપાલ) - નિંદા કરનાર - સહનશીલતા અને શાંતિ (૭) ભાઈ / બહેન (બલરામ/ સુભદ્રા/ શૈવ્યા) - કુટુંબી જન અથવા સંબંધો - પ્રેમ,પોષણ પ્રસન્નતા (૮) ધર્માત્મા (ગુરુ સાંદીપનિ) - ગુરુ, ધર્મ તરફ વાળનાર - યોગ્ય દિશા આપનાર (૯) પાપી (કૌરવો). - આ, તેમ જ આગળની જનરેશન નું અહિત કરનાર. (લાંબા સમય સુધી પૃથ્વી પર ઉપદ્રવ ફેલાવનાર, જેનો નાશ કરવો કૃષ્ણ નો ધર્મ છે.) - સર્વ હિત ની ભાવના નો વિકાસ              આ નવ પ્રકાર ના લોકો જીવન યાત્રા માં મળે છે.. આ સર્વે નવ પ્રકારના લોકો માં ફક્ત વિકાસ જ...

मंत्र ,तंत्र और यंत्र का क्या प्रयोजन है? यह उपाय के तौर पर ठीक है?

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प्रश्न : मंत्र ,तंत्र और यंत्र का क्या प्रयोजन है? यह उपाय के तौर पर ठीक है? उत्तर : मंत्र का अर्थ है Code, तंत्र यानी System, यंत्र का अर्थ है Machine.    Code , System and Machine इन तीनों के संयोजन से एक टेक्नोलॉजी का निर्माण होता है। यह टेक्नोलॉजी किसी विशेष प्रयोजन के लिए होती है।  परन्तु टेक्नोलॉजी का यह अर्थ बाह्य संसाधनों के विकास के लिए है।           पारंपरिक अर्थ के रूप में मंत्र,तंत्र,और यंत्र का उपयोग स्वभाव, विचार और कर्मों को दिशा देने के लिए होता था।        जो बाद में अलग अलग प्रकार की साधना,उपासना,अनुष्ठान और क्रियाकांड में बदल कर विकृत हो गया, और इसका प्रयोग इष्ट देवी या देवता को सात्विक ,राजसी और तामसिक रूप से प्रसन्न करने और इच्छा पूर्ति के लिए होने लगा। यज्ञ और होम हवन के लिए भी होने लगा। इसके बाद विविध प्रकार के सांप्रदायिक उपचारों हेतु ग्रहों और उसके कारकत्व के साथ मंत्र ,तंत्र,यंत्र को जोड़ दिया। और इसका प्रभाव बहुत समय तक समाज में रहा, बाद में यह केवल देवी देवताओं तक सीमित न रह कर नाग,किन्नर, अप्सरा, यक्...

कुदरत, कानून, समाज : शादी और रिलेशनशिप

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१६ से १८ साल के बच्चे अपनी फ्यूचर रिलेशनशिप और उसके स्टेट्स के बारे में जब पूछते, तब मजा आता है क्योंकि वह बड़े भोले होते है, और २० - २२ साल के बच्चे शादी के बारे में सोचने लगते है और पूछने लगते है। अब यह बात अच्छे से समझे, --------------------- आप का शरीर १४-१५ साल की उम्र से ही विजातीय आकर्षण महसूस करता है। यह बात सच है, और यह भी सच है कि भारत में लड़की के लिए शादी या संबंध शुरू करने की जो लघुतम आयु है वह १८ वर्ष है , और लड़के के लिए यह उम्र २१ साल है।        समाज के नियम कुछ अलग है, समाज में लड़का और लड़की का परिवार, उनकी शिक्षा, उनकी कमाई, जीवनशैली , चरित्र, घर, सुविधाएं, जाति,संप्रदाय यह सब कुछ देखा जाता है। और आज कल समाज में औसतन २४-२५ साल के बाद ही रिश्ता देखने की शुरुवात होती है।    शादी की जहां तक बात है आपको कानून और समाज दोनों के हिसाब से खुद को काबिल बनाना होगा, और तब तक शादी के बारे में प्रश्न करना कुछ हद तक आपकी कल्पनाओं और विचारों को बोझ ही देगा। अब रही मैत्री संबंध, प्रेम विवाह, सिचुएशनशिप की बात तो उस बारे में भी आप ...

भविष्यवाणी की कला: भय का व्यापार या समाधान की राह?

 नियतिबाद (Fatalism / Determinism) एक दार्शनिक विचार है जो मानता है कि इंसान के जीवन में जो कुछ भी होता है, वो पहले से तय है। यानी आपके फैसले, घटनाएँ और भविष्य पहले से ही "लिखे हुए" हैं - उन्हें बदला नहीं जा सकता। आपके निर्णय और कर्म भी अगणित कर्मों की श्रृंखला का एक छोटा सा हिस्सा है । उन कर्मों के गणित के आधार पर समय और अवकाश का निर्धारण होता है। कुंडली और अंकशास्त्र जैसे विषयों में भविष्यवाणी की जाती है, अब वह भविष्यवाणी का मूल आधार क्या है। हमारे मनीषियों ने ब्रह्माण्डीय पिंडो को मनुष्य जीवन के गुणों और उन गुणों को प्रभावित करने वाले परिणामों को एक दूसरे के साथ जोड़ दिया है। उनको इतना ज्ञान था कि गुण ही गुण में व्यक्त होते है।  सुर्य को नेतृत्व का कारक कहा गया है, यह कारकत्व ही वह जोड़ है ,जो ब्रह्मांड और जीवन को जोड़ता है। अब सूर्य के साथ अंक १ को जोड़ा , यानी कि अंक १ और सूर्य का नेतृत्व के गुण से संबध हो गया, इसका कारण है कि सूर्य सारे पिंडो का केंद्र है और सब ग्रह उसकी परिक्रमा करते है। इसी तरह ब्रह्मांड की गति को मनुष्य जीवन के गुणों से जोड़ कर व्यक्ति की जन्म दिनां...

Stress, Anxiety & Depression के बीच का अंतर और उसका अंकशास्त्र से संबंध

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 Stress, Anxiety & Depression के बीच का अंतर और उसका अंकशास्त्र से संबंध -------------------------------- Stress: स्ट्रेस को सामान्य भाषा में तनाव कहा जाता है, ज्यादा तर भूतकाल में घटी दुखद घटनाओं का यह एक संवेदनशील प्रतिभाव है। जब आप किसी भी बुरी परिस्थिति को भूल नहीं पाते या फिर उसकी गहरी चोट आपको तकलीफ दे रही हो उसके परिणाम स्वरूप आप के दिमाग में तनाव के रसायन एक्टिव होते है।  सामान्य जीवन में छोटे मोटे तनाव हम हमेशा झेलते है,जैसे किसी का प्रोमिस कर के भी मिटिंग के लिए न आना, किसी जरूरी काम पर जाते वक्त गाड़ी खराब हो जाना, यह तनाव से हम कुछ ही देर में बहार निकल आते है परन्तु जब घटना हमारे बरदास्त के बहार हो और हमें उसका समाधान न मिल रहा हो तो यह तनाव ज्यादा बढ़ जाता है। सामान्य तौर पर ध्यान, रिलेक्सेशन और कसरत करने से तथा, मन के स्तर पर घटनाओं को स्वीकार करने से तनावकारी उलझने समाप्त होती है। Anxiety: इसको चिंता कहा जाता है, चिंता का स्वरूप भविष्य के डर पर आधारित है, चिंता अज्ञात और ज्ञात भय और लोभ से जन्म लेती है, जिसका ज्यादातर संबंध भविष्य से है, भविष्य कभी भी देखा न...

किसी भी व्यक्ति को समस्या बताने से पहले यह समझे।

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 5 प्रकार के विशेषज्ञ ----------------- गुढ़ विज्ञान में रुचि रखने वाला या कोई भी गुढ़ विज्ञान को समझने का इच्छुक इंसान जब भी चिंता, भय,तकलीफ ,लालसा,दुख से पीड़ित होता है तो वह 5 प्रकार के लोगों के पास जाता है। (१) बाबा/ आध्यात्मिक गुरु  ----------------------- यह लोग प्रवचन ,दृष्टांत और विविध क्रिया ,ध्यान और तकनीकों के माध्यम से पीड़ा मिटाते है। इनके पास अपनी एक प्रणाली होती है, अपनी एक क्रिया होती है, जैसे सहज योग, ईशा योग, विहंगम योग, स्वराज क्रिया योग, कुंडलिनी जागरण और इसी के आसपास यह लोग गीता, उपनिषद, पुराण और अन्य कहानियां एवं सूत्रों पर सत्र या प्रवचन या व्याख्यान देकर मनुष्य को शांति का अनुभव करवाते है, इनका अपना एक अनुयायी वर्ग और ट्रस्ट होता है। इनके शिविर भी होते है, जहां वस्तु और सेवा का सेवा के उद्देश्य से व्यापार भी किया जाता है।  (२) तांत्रिक / ओझा  -------------------- - तांत्रिक या ओझा अपने को साधक बताते है, वह तंत्र और मंत्र की शक्ति , टोने टोटके और वशीकरण के दम पर अपने पर श्रद्धा रखने वाले लालसा युक्त भक्तों का उद्धार करते है। मानसिक भरम का इला...

કર્મયોગ

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કર્મ કેટલા પ્રકાર ના હોય છે? ------------------------ (૧) સાત્વિક કર્મ: આ કર્મ પ્રસન્નતા ,આનંદ અને શાંતિ આપે છે, સ્વાસ્થ્ય અને અનુકૂળતા પણ બક્ષે છે.   દા.ત: એક કુટુંબ ના સભ્યો જ્યારે સાથે મળીને રમતો રમે છે અને આનંદ કરે છે. (૨) રાજસી કર્મ : આ કર્મ ગર્વ ,આત્મવિશ્વાસ અને પ્રભાવ માં વૃદ્ધિ અથવા ઘટાડો આપે છે. આ કર્મ પાછળ વૃદ્ધિની લાલસા ની સાથે સાથે માન અને પ્રશંસા ની આશા હોય છે. દા:ત પ્રમોશન કે રિટાયરમેન્ટ વખતે આપેલી પાર્ટી અથવા ગેટ ટુ ગેધર. (૩) તામસી કર્મ : આ કર્મ પાછળ સ્વાર્થ, મહત્વકાંક્ષા ,લાલસા ,ક્રોધ જોવા મળે છે. આ કર્મ પાછળ ક્યારેક આળસ,મોહ અને ક્રૂરતા નો ભાવ પણ હોય છે. આવા કર્મો વ્યર્થ ના સંઘર્ષ ઊભા કરે છે. દા:ત: માત્ર શારીરિક હવસ ને પૂરી કરવા માટે દર્શાવેલ શોષણ પૂર્ણ સંવેદનહીન અશ્લીલ દૃશ્યો. આ પ્રકારની પોર્ન ફિલ્મો મનુષ્ય ના મન માં વિકાર ઉત્પન્ન કરે છે.. અને એવા મનને વિકૃત થતાં વાર નથી લાગતી) (૪) નિર્ગુણ કર્મ : આ કર્મ સર્વ ના હિત માટે કરવામાં આવેલું કર્મ છે. આ કોઈ પણ હોઈ શકે. આ કર્તવ્ય અથવા સર્વ ના લાભ ને ધ્યાન માં રાખી ને મમત્વ વિના કરવા માં આવેલું કર્મ છે. (દા:ત) તકતી મા...