Stress, Anxiety & Depression के बीच का अंतर और उसका अंकशास्त्र से संबंध
Stress, Anxiety & Depression के बीच का अंतर और उसका अंकशास्त्र से संबंध
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Stress: स्ट्रेस को सामान्य भाषा में तनाव कहा जाता है, ज्यादा तर भूतकाल में घटी दुखद घटनाओं का यह एक संवेदनशील प्रतिभाव है। जब आप किसी भी बुरी परिस्थिति को भूल नहीं पाते या फिर उसकी गहरी चोट आपको तकलीफ दे रही हो उसके परिणाम स्वरूप आप के दिमाग में तनाव के रसायन एक्टिव होते है।
सामान्य जीवन में छोटे मोटे तनाव हम हमेशा झेलते है,जैसे किसी का प्रोमिस कर के भी मिटिंग के लिए न आना, किसी जरूरी काम पर जाते वक्त गाड़ी खराब हो जाना, यह तनाव से हम कुछ ही देर में बहार निकल आते है परन्तु जब घटना हमारे बरदास्त के बहार हो और हमें उसका समाधान न मिल रहा हो तो यह तनाव ज्यादा बढ़ जाता है।
सामान्य तौर पर ध्यान, रिलेक्सेशन और कसरत करने से तथा, मन के स्तर पर घटनाओं को स्वीकार करने से तनावकारी उलझने समाप्त होती है।
Anxiety: इसको चिंता कहा जाता है, चिंता का स्वरूप भविष्य के डर पर आधारित है, चिंता अज्ञात और ज्ञात भय और लोभ से जन्म लेती है, जिसका ज्यादातर संबंध भविष्य से है, भविष्य कभी भी देखा नहीं जा सकता परन्तु हम आगे के कल को लेकर जब तनाव महसूस करते है तो चिंता का जन्म होता है।
चिंता को भी निर्भयता और स्वीकार भाव से कम किया जा सकता है।
चिंता और तनाव किसी भी व्यक्ति या विषय में जरूरत से ज्यादा इन्वॉल्व होने से भी होता है। जब आप किसी व्यक्ति या वस्तु को बहुत ही ज्यादा महत्व देते हो और उसको हावी होने देते हो तो भी यह हो सकता है।
Depression: जिसे हम अवसाद कहते है, वह चिंता और तनाव का विनाशक और अति रूप है, जब चिंता और तनाव बहुत ज्यादा बढ़ कर मन ,शरीर ,दिनचर्या और संबंधों पर असर करने लगे तो समझ लो कि आपको अवसाद ने घेरा है, इसकी अवधि निश्चित नहीं, परन्तु यदि ३ महीने से ज्यादा आपको तनाव या चिंता लगी रहती है, आप शक्तिहीन महसूस करते हो तो यह अवसाद के लक्षण है। इसको क्रोनिक डिप्रेशन भी कहते है। कभी कभी कुछ समय के लिए भी अवसाद होता है, उसे टेम्परेरी डिप्रेशन कहते है, ज्यादातर किसी प्रिय व्यक्ति की मृत्यु से जन्मे शोक के कारण या कभी कभी गर्भावस्था के बाद भी यह हो सकता है।
व्यक्ति यदि किसी भी कारण से रोज,
निराश, असहाय और कमतर महसूस करता है तो वह भी डिप्रेशन का कारण हो सकता है।
अंकशास्त्र में अंक २ और अंक ४ ( चंद्रमा और राहु) तनाव दिखाते है, अंक २ और ८ ( चंद्रमा और शनि) अवसाद दिखाते है। और अंक ९ और ४ ( मंगल और राहु) का योग चिंता दिखाता है।
- यश शाह ( Numerologist )

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