Posts

Showing posts from July, 2026

ભગવદગીતા અધ્યાય ૬ શ્લોક ૯.

Image
 ભગવદગીતા અધ્યાય ૬ શ્લોક ૯. ------------------------------ (૧) પ્રેમી  - હૃદય થી પ્રેમ કરનાર (રાધા/ માતા પિતા પત્નીઓ) - પ્રેમ,પોષણ પ્રસન્નતા (૨) મિત્ર -  સુખ દુઃખ માં સાથે રહેનાર (ઉદ્ધવ,સાત્યકિ) -  પ્રેમ, પોષણ, પ્રસન્નતા (૩) શત્રુ - અહિત કરનાર (જરાસંઘ) - ચુનૌતી (૪) અજાણ્યો - (પુણ્યજન રાક્ષસ) - જે આપણ ને બિલકુલ જાણતો નથી તે. - સ્વીકાર અને મર્યાદા (૫) તટસ્થ -(પરશુરામ) - જે  બાકી ના આઠ માંથી  કોઈ નથી તે. - સ્વીકાર (૬) તિરસ્કાર કરનાર (દ્વેષી) (શિશુપાલ) - નિંદા કરનાર - સહનશીલતા અને શાંતિ (૭) ભાઈ / બહેન (બલરામ/ સુભદ્રા/ શૈવ્યા) - કુટુંબી જન અથવા સંબંધો - પ્રેમ,પોષણ પ્રસન્નતા (૮) ધર્માત્મા (ગુરુ સાંદીપનિ) - ગુરુ, ધર્મ તરફ વાળનાર - યોગ્ય દિશા આપનાર (૯) પાપી (કૌરવો). - આ, તેમ જ આગળની જનરેશન નું અહિત કરનાર. (લાંબા સમય સુધી પૃથ્વી પર ઉપદ્રવ ફેલાવનાર, જેનો નાશ કરવો કૃષ્ણ નો ધર્મ છે.) - સર્વ હિત ની ભાવના નો વિકાસ              આ નવ પ્રકાર ના લોકો જીવન યાત્રા માં મળે છે.. આ સર્વે નવ પ્રકારના લોકો માં ફક્ત વિકાસ જ...

मंत्र ,तंत्र और यंत्र का क्या प्रयोजन है? यह उपाय के तौर पर ठीक है?

Image
प्रश्न : मंत्र ,तंत्र और यंत्र का क्या प्रयोजन है? यह उपाय के तौर पर ठीक है? उत्तर : मंत्र का अर्थ है Code, तंत्र यानी System, यंत्र का अर्थ है Machine.    Code , System and Machine इन तीनों के संयोजन से एक टेक्नोलॉजी का निर्माण होता है। यह टेक्नोलॉजी किसी विशेष प्रयोजन के लिए होती है।  परन्तु टेक्नोलॉजी का यह अर्थ बाह्य संसाधनों के विकास के लिए है।           पारंपरिक अर्थ के रूप में मंत्र,तंत्र,और यंत्र का उपयोग स्वभाव, विचार और कर्मों को दिशा देने के लिए होता था।        जो बाद में अलग अलग प्रकार की साधना,उपासना,अनुष्ठान और क्रियाकांड में बदल कर विकृत हो गया, और इसका प्रयोग इष्ट देवी या देवता को सात्विक ,राजसी और तामसिक रूप से प्रसन्न करने और इच्छा पूर्ति के लिए होने लगा। यज्ञ और होम हवन के लिए भी होने लगा। इसके बाद विविध प्रकार के सांप्रदायिक उपचारों हेतु ग्रहों और उसके कारकत्व के साथ मंत्र ,तंत्र,यंत्र को जोड़ दिया। और इसका प्रभाव बहुत समय तक समाज में रहा, बाद में यह केवल देवी देवताओं तक सीमित न रह कर नाग,किन्नर, अप्सरा, यक्...

कुदरत, कानून, समाज : शादी और रिलेशनशिप

Image
१६ से १८ साल के बच्चे अपनी फ्यूचर रिलेशनशिप और उसके स्टेट्स के बारे में जब पूछते, तब मजा आता है क्योंकि वह बड़े भोले होते है, और २० - २२ साल के बच्चे शादी के बारे में सोचने लगते है और पूछने लगते है। अब यह बात अच्छे से समझे, --------------------- आप का शरीर १४-१५ साल की उम्र से ही विजातीय आकर्षण महसूस करता है। यह बात सच है, और यह भी सच है कि भारत में लड़की के लिए शादी या संबंध शुरू करने की जो लघुतम आयु है वह १८ वर्ष है , और लड़के के लिए यह उम्र २१ साल है।        समाज के नियम कुछ अलग है, समाज में लड़का और लड़की का परिवार, उनकी शिक्षा, उनकी कमाई, जीवनशैली , चरित्र, घर, सुविधाएं, जाति,संप्रदाय यह सब कुछ देखा जाता है। और आज कल समाज में औसतन २४-२५ साल के बाद ही रिश्ता देखने की शुरुवात होती है।    शादी की जहां तक बात है आपको कानून और समाज दोनों के हिसाब से खुद को काबिल बनाना होगा, और तब तक शादी के बारे में प्रश्न करना कुछ हद तक आपकी कल्पनाओं और विचारों को बोझ ही देगा। अब रही मैत्री संबंध, प्रेम विवाह, सिचुएशनशिप की बात तो उस बारे में भी आप ...

भविष्यवाणी की कला: भय का व्यापार या समाधान की राह?

 नियतिबाद (Fatalism / Determinism) एक दार्शनिक विचार है जो मानता है कि इंसान के जीवन में जो कुछ भी होता है, वो पहले से तय है। यानी आपके फैसले, घटनाएँ और भविष्य पहले से ही "लिखे हुए" हैं - उन्हें बदला नहीं जा सकता। आपके निर्णय और कर्म भी अगणित कर्मों की श्रृंखला का एक छोटा सा हिस्सा है । उन कर्मों के गणित के आधार पर समय और अवकाश का निर्धारण होता है। कुंडली और अंकशास्त्र जैसे विषयों में भविष्यवाणी की जाती है, अब वह भविष्यवाणी का मूल आधार क्या है। हमारे मनीषियों ने ब्रह्माण्डीय पिंडो को मनुष्य जीवन के गुणों और उन गुणों को प्रभावित करने वाले परिणामों को एक दूसरे के साथ जोड़ दिया है। उनको इतना ज्ञान था कि गुण ही गुण में व्यक्त होते है।  सुर्य को नेतृत्व का कारक कहा गया है, यह कारकत्व ही वह जोड़ है ,जो ब्रह्मांड और जीवन को जोड़ता है। अब सूर्य के साथ अंक १ को जोड़ा , यानी कि अंक १ और सूर्य का नेतृत्व के गुण से संबध हो गया, इसका कारण है कि सूर्य सारे पिंडो का केंद्र है और सब ग्रह उसकी परिक्रमा करते है। इसी तरह ब्रह्मांड की गति को मनुष्य जीवन के गुणों से जोड़ कर व्यक्ति की जन्म दिनां...