मंत्र ,तंत्र और यंत्र का क्या प्रयोजन है? यह उपाय के तौर पर ठीक है?

प्रश्न : मंत्र ,तंत्र और यंत्र का क्या प्रयोजन है? यह उपाय के तौर पर ठीक है?

उत्तर : मंत्र का अर्थ है Code, तंत्र यानी System, यंत्र का अर्थ है Machine.    Code , System and Machine इन तीनों के संयोजन से एक टेक्नोलॉजी का निर्माण होता है। यह टेक्नोलॉजी किसी विशेष प्रयोजन के लिए होती है। 

परन्तु टेक्नोलॉजी का यह अर्थ बाह्य संसाधनों के विकास के लिए है।

          पारंपरिक अर्थ के रूप में मंत्र,तंत्र,और यंत्र का उपयोग स्वभाव, विचार और कर्मों को दिशा देने के लिए होता था।

       जो बाद में अलग अलग प्रकार की साधना,उपासना,अनुष्ठान और क्रियाकांड में बदल कर विकृत हो गया, और इसका प्रयोग इष्ट देवी या देवता को सात्विक ,राजसी और तामसिक रूप से प्रसन्न करने और इच्छा पूर्ति के लिए होने लगा। यज्ञ और होम हवन के लिए भी होने लगा। इसके बाद विविध प्रकार के सांप्रदायिक उपचारों हेतु ग्रहों और उसके कारकत्व के साथ मंत्र ,तंत्र,यंत्र को जोड़ दिया। और इसका प्रभाव बहुत समय तक समाज में रहा, बाद में यह केवल देवी देवताओं तक सीमित न रह कर नाग,किन्नर, अप्सरा, यक्षिणी,भूत ,प्रेत, गण, भैरव,पिशाच, डाकिनी, शाकिनी, बैताल, ब्रम्हराक्षस, पीर, फकीर, महात्माओं, संतो , वीर,जोगिनी की विशिष्ट कृपा प्राप्ति हेतु किए जाने वाले अभिचारिक प्रयोगों का माध्यम बन गया और यहां से और विकृत हो कर विविध प्रकार के अंधविश्वासी विचारों को फैलाने का निमित्त बन गया, जिनसे बहुत प्रकार के मानसिक रोगों का जन्म हुआ, और समाज में आज भी इसका भय फैला हुआ है। 

ज्योतिष में ग्रह पीड़ा के निवारण के लिए, रत्नों को सिद्ध करने हेतु , दान के संकल्प के लिए एवं और भी बहुत तरह से आज भी इसका प्रयोग किया जाता है, जो मेरी दृष्टि में अंधविश्वास ही है।

     यह कर्म और पुरुषार्थ की जगह चमत्कार और जादू की मानसिकता को बढ़ावा देता है, गुणों में वृद्धि की जगह स्थूल और शुष्क आराधनाओं को और आडम्बरों को जन्म देता है। इसी लिए उपाय के तौर पर केवल श्रद्धा से ही इसका उपयोग ठीक है परन्तु इस से किसी विशेष लाभ की प्राप्ति पर संशय है।



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