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Showing posts from December, 2025

ટીન એજ - તરંગી ઉંમર ની વાતો.

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 અહીંયા ટીન એજ સંબધી પ્રશ્નો રજૂ કરું છું.. જે તરુણ વય એ પહોચેલા છોકરા છોકરીઓ ના સામાન્ય પ્રશ્નો હોઇ શકે. (૧) "અમે મિત્રો, પહેલી વાર ગ્રુપ માં બહાર જઈએ છીએ.. વેકેશન માં અમે પહેલી વાર આવું પ્લાનિંગ કર્યું છે. ગ્રુપ માં ૪ છોકરીઓ અને ૩ છોકરાઓ છે. અમારે શું સાવધાની રાખવી જોઈએ" (જ.) ટીન એજ માં પ્રથમ વખત આવું પ્લાનિંગ કરવું એ ઉત્સાહ ની વાત છે.. પહેલી વખત ગ્રુપ સાથે એકલા ફરવા જવું એક નવો અનુભવ હોય છે. અને આ સમય લગભગ દરેક ના જીવન માં આવે જ છે.. તો તેનો સ્વીકાર કરવો.. અને નીચેની સાવધાનીઓ રાખવી. (૧) ગ્રુપ ના ૭ વ્યક્તિઓ ની માહિતી દરેક ના મમ્મી પપ્પા ને હોવી જોઈએ. દરેક ના ઘર ના નંબર બધા ના ફોન માં સાચવેલા હોવા જોઈએ. (૨) તમે જે જગ્યાએ જાવ ,ત્યાંની તમામ માહિતી, તમારો સ્ટે ,તમારો ફરવાનો પ્રોગ્રામ, તમારા ડ્રાઈવર નો નંબર તમારા તેમ જ દરેક ના માં બાપ પાસે હોવો જોઈએ. જરૂરી દવાઓ અને first -aid બોક્સ સાથે રાખવું. હમેશા તમારા સેલ ફોન માં લાઇવ લોકેશન ઓન રાખવું.. અને સમય પર મોબાઈલ ચાર્જ કરવો. (૩) ગ્રુપ સ્ટે દરમ્યાન પણ કોઈ એ આપેલા ગ્લાસ કે થાળી માંથી કશું જ ખાવું પીવું નહી.. પોતાનો ગ્લાસ તથા થાળી પો...

Health Care Numerology

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Health Code Formula: --------------------- Before Transformation age: Root Number  + Birth Day Number  + Hour Health Number  + Minute Health Number  + Day of Birth Number  After Transformation Age Destiny Number  + Hour Health Number  + Minute Health Number  + Day Of Birth Number  Now Example: Date :26/08/1993 Time : 7:12 pm Day: Thursday  Before My Transformation ( Age 0 to 29) Root :8 Hour Number:2 Minute Number:9 Day of Birth: 3 ( Thursday) ------------------ Total: 4 ( Step :1) After My Transformation ( From Age 3o to lifelong) Destiny:2 + Hour :2 + minute :9 + Day : 3 --------------------- Total :7 ( Step :2) My Health Care Number= Step :1 + Step :2 = 4+7 = 2 So I have to be careful Regarding Health issues of  4 , 7 & 2 Health Code : 472 Use Given Table For Health Hour & Minute Number. Health Problems According to Numbers. --------------------------------------------- 1. Number: 1 (Sun)  * Problems: Eye problems ...

पितृ दोष : मेरे दृष्टिकोण से।

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 पितृ दोष : मेरे दृष्टिकोण से। पारम्परिक ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष के नाम पर विधि विधान का प्रावधान है, सनातन विचारधारा बरसों से पूर्व जन्म और आने वाले जन्मों में विश्वास रखती है, मृत्यु के बाद व्यक्ति आत्मा के रूप में पितृ लोक ,नाग लोक , वैकुंठ में निवास करता है, ऐसी विचारधारा है, पहले पितृ दोष के कारण जान ले। यह कहा जाता है, कि आपकी कुंडली में अगर १२वे घर में शनि और सूर्य का योग हो, या राहु और सूर्य का योग हो, अथवा १२ वे घर में बैठे सूर्य को शनि या राहु देखते हो ,तो आपकी कुंडली में पितृ दोष हो सकता है। नवम भाव में भी यह दोष बन सकता है।अब इस के लक्षण जान ले। यदि आपके घर में बरसो से आर्थिक संकट हो, बिना किसी भी कारण बीमारियां लगी रहती हो, बार बार घर की मरम्मत करवानी पड़ती हो, घर में लगाए पौधे जल्दी सुख जाते हो, घर में निरंतर अशांति और क्लेश रहता हो, आपके घर के कमाने वाले सदस्य के ऊपर ऋण हो, घर की स्त्री या बच्चे असाध्य बीमारी से ग्रस्त हो, और अक्सर घर के बाहर कुत्ते रोते हो, बिल्ली और बिल्ला झगड़ते रहते हो, तुलसी आप के घर में लगने पर बार बार जल जाती हो, गाय या कुत्ते आपके घर की ...

मंगल दोष : क्या सही,क्या गलत।

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                 ज ब लड़का और लड़की की शादी की बात होती है, तो मंगल दोष के नाम पर लोग ज्योतिषी के पास जाते है, ज्योतिष शास्त्र के जानकार से अक्सर यह सुनने को मिलता है” मंगल भारी है” , “पगड़ी पर मंगल है,” , “चुनरी पर मंगल है”, “ आंशिक मंगल दोष है”। और इनके निवारण के लिए कभी कभी पेड़ या घड़े से शादी करवाई जाती है, हनुमानजी को चोला चढ़ाना और हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह दी जाती है, कभी केसरिया गणपति की पूजा करवाई जाती है। ज्योतिषी अक्सर यह कहते है, कि मंगल दोष का निवारण २८ वर्ष की आयु के बाद स्वयं हो जाता है, पर कभी भी जातक या उसके माता पिता को यह नहीं बताते कि मंगल दोष कैसे बनता है, या ऐसा कुछ होता भी है या नहीं। पहले पारंपरिक मान्यता देखते है। किसी की भी कुंडली में १,४,७,८,१२ घर में मंगल हो, तो मंगल दोष कहा जाता है, यदि इन घरों में गुरु से दृष्ट हो तो आंशिक मंगल दोष कहा जाता है। और यह भी मान्यता है, की गुरु से दृष्ट हो कर मंगल दोष नष्ट हो जाता है। कुछ लोग २ और १० वे घर में भी मंगल दोष मानते है, और यह कहा जाता है, की अगर वर को मंगल दोष हो,...

ज्योतिषी सेवा और शुल्क।

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       पुराने दिनों में ज्योतिष और पुजारी एक हुआ करते थे। पुजारी का भी दक्षिणा पर अधिकार होता था। कुंडली दिखा कर प्रश्न पूछने पर जातक ज्योतिष को दक्षिणा देता था। परन्तु ज्योतिष उस समय पर किसी पीड़ा या दोष के निवारण हेतु दिखाया जाता था। पहले के समय में शादी बचपन में होती थी, पढ़ाई का व्याप इतना ज्यादा नहीं था, और बेटा बाप के काम को ही ज्यादातर आगे बढ़ाता था। खेती,पशुपालन और व्यापार जैसे व्यवसाय के क्षेत्र निश्चित थे। उचित समय पर बच्चे भी हो जाते थे। उस समय व्यापक तरीके से ज्योतिष केवल नामकरण,वर वधू गुण मिलान, मुहूर्त, रोग, आयु, ग्रहों की पीड़ा और दोष के उपाय के रूप में पूजा पाठ करवाने के लिए होता था।               धीरे धीरे ज्योतिषी से शिक्षा,व्यवसाय,नौकरी,पद, व्यापार,विदेश यात्रा, विवाह , बच्चे आदि के बारे में भी पूछा जाने लगा। अब अवैध संबंध और तलाक के बारे में, कोर्ट केस के विजय और पराजय एवं प्रॉपर्टी और वाहन की खरीद बैच और शेयर बाजार, राजनीति आदि विषयों में भी ज्योतिष की सलाह ली जाती है।, ज्योतिष पढ़ने के लिए समय और शुल्क दोन...

प्रश्न अंकशास्त्र पद्धति

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 प्रश्न अंकशास्त्र पद्धति ( सटीक जवाब)  ( एक वक्त पर एक ही प्रश्न पूछे।) विधि : १  अपने प्रश्न को उचित और स्पष्ट ढंग से सोचे। १२ to १०८ में से कोई एक अंक बोले। उस चुने हुए अंक को १२ से भाग दे। जो शेष ( रिमाइंडर) बचे उसे देखे। अगर शेष : २,३,६,११ है, तो आप का काम हो जाएगा। Answer: Yes. विधि :२ --------- (१) प्रश्न सोचे। (२) १ से २४९ के बीच कोई एक संख्या बोले। (३) उस संख्या को १२ से भाग दे। जो शेष (रिमाइंडर) बचे उसे देखे। यदि शेष, २,६,१०,११ है तो कार्य सिद्ध होगा। १,३,७,९ है तो कार्य सिद्ध होने में बाधा और विलंब के बाद सफल। ४,५,८ है तो कार्य में असफलता। विधि:३ ------- अष्ट मंगल प्रश्न विद्या। (केरल के पंडितों की प्राचीन विद्या) भाग: अ (फल कथन) १ - सूर्य (Yes) २ - मंगल (No) ३ - गुरु (Yes) ४ - बुध (No) ५ - शुक्र (Yes) ६ - शनि ( No) ७ - चंद्र (Yes) ८ - राहु (No) विधि स्टेप १: अपना प्रश्न ज्योतिषी को बताएं। स्टेप २: अंक १ से ८ में से कोई भी तीन अंक चुनें। स्टेप ३: पहला अंक: भूतकाल (अतीत), दूसरा अंक वर्तमान और तीसरा अंक भविष्य (भविष्य) का निर्देश करता है। भाग : ब (मार्गदर्शन) स्ट...